Friday, January 1

Raaz

गहरा राज़ 


अफसानों से सार है बंधा ,

लम्हों से इंतज़ार हैं बंधा ;

हर पहर ढूंढ़ता है एक दास्ताँ , 

जिससे जीवन का भाव है बंधा || 


शब्दों से गहरा, करीबी रिश्तों का प्यार है बंधा ,

उमीदों की डोर से रिश्ते  का  व्यवहार है बंधा ;

वक्त के पेहेर से उलझा , दोस्ती का प्रमाण  है बंधा ,

जो शब्दों के सन्दर्भ से ना डगमगाये , उसी रिश्ते में संस्कार है बंधा || 

The Power of Spoken Words

लफ्ज़ की लफ्ज़ से गुफ्तगू 

इतराते हुए सर का ताज हूँ मैं, 
बनते हुए रिश्तों की बुनियाद हूँ मैं। ... 

जाने कितने ही ज़ख्मों का इलाज हूँ में ,
गौर से जानो तो , दिल का सच्चा हमराज़ हूँ मैं ;

ना किसी बोली , ना कोई कीमत , 
ना समय , ना किसी तिजोरी का गुलाम हूँ मैं ;

लग जाऊं तो तीर ,
मिट जाऊं तो प्यार ,
रुक जाऊं तो होशियार ,
सहम जाऊं तो वफादार ;

बनते बिगड़ते हर रिश्ते का नकाब हूँ मैं,
इतराते हुए सर का ताज हूँ मैं ;

New Year


ज़िंदगी की पुस्तका में एक नया पना जुड़ रहा है ,

सुन्हेरे खाबों को सजाने का नवीन अफसर बन रहा है ;

गुज़रे बरस की ठोकरों से हँस कर निकल आने का इनाम मिल रहा है ,

आज फिर से सभी को खिलखिलाने का मौका सज रहा है ;

जीते जीते तो कई बरस बीत गए ,

आते वर्ष ज़िंदगी को खुल के जी जाने का संदेसा बंध रहा है ;

इकीसवीं सदी के अद्भुद रंगों वाकिफ होने का समा बन रहा है ,

आने वाले सुनहरे पलों के स्वागत में हर गुल खिल रहा है ;

एक नया गुलिस्तां बन रहा है ,

एक हसीं गुलिस्तां बन रहा है ;


नव वर्ष की शुभ कामनायें || 

Welcome 2021!


 

Thank you 2021 for all that you offered

Thank you!! 2021 for all you offered 👏 Thank you 2021 for all you proffered,  Inspite challenges, we became stronger; Vaccine unlocked the ...