Friday, January 1

The Power of Spoken Words

लफ्ज़ की लफ्ज़ से गुफ्तगू 

इतराते हुए सर का ताज हूँ मैं, 
बनते हुए रिश्तों की बुनियाद हूँ मैं। ... 

जाने कितने ही ज़ख्मों का इलाज हूँ में ,
गौर से जानो तो , दिल का सच्चा हमराज़ हूँ मैं ;

ना किसी बोली , ना कोई कीमत , 
ना समय , ना किसी तिजोरी का गुलाम हूँ मैं ;

लग जाऊं तो तीर ,
मिट जाऊं तो प्यार ,
रुक जाऊं तो होशियार ,
सहम जाऊं तो वफादार ;

बनते बिगड़ते हर रिश्ते का नकाब हूँ मैं,
इतराते हुए सर का ताज हूँ मैं ;

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