Friday, January 1

New Year


ज़िंदगी की पुस्तका में एक नया पना जुड़ रहा है ,

सुन्हेरे खाबों को सजाने का नवीन अफसर बन रहा है ;

गुज़रे बरस की ठोकरों से हँस कर निकल आने का इनाम मिल रहा है ,

आज फिर से सभी को खिलखिलाने का मौका सज रहा है ;

जीते जीते तो कई बरस बीत गए ,

आते वर्ष ज़िंदगी को खुल के जी जाने का संदेसा बंध रहा है ;

इकीसवीं सदी के अद्भुद रंगों वाकिफ होने का समा बन रहा है ,

आने वाले सुनहरे पलों के स्वागत में हर गुल खिल रहा है ;

एक नया गुलिस्तां बन रहा है ,

एक हसीं गुलिस्तां बन रहा है ;


नव वर्ष की शुभ कामनायें || 

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