गहरा राज़
अफसानों से सार है बंधा ,
लम्हों से इंतज़ार हैं बंधा ;
हर पहर ढूंढ़ता है एक दास्ताँ ,
जिससे जीवन का भाव है बंधा ||
शब्दों से गहरा, करीबी रिश्तों का प्यार है बंधा ,
उमीदों की डोर से रिश्ते का व्यवहार है बंधा ;
वक्त के पेहेर से उलझा , दोस्ती का प्रमाण है बंधा ,
जो शब्दों के सन्दर्भ से ना डगमगाये , उसी रिश्ते में संस्कार है बंधा ||
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