Friday, January 1

Raaz

गहरा राज़ 


अफसानों से सार है बंधा ,

लम्हों से इंतज़ार हैं बंधा ;

हर पहर ढूंढ़ता है एक दास्ताँ , 

जिससे जीवन का भाव है बंधा || 


शब्दों से गहरा, करीबी रिश्तों का प्यार है बंधा ,

उमीदों की डोर से रिश्ते  का  व्यवहार है बंधा ;

वक्त के पेहेर से उलझा , दोस्ती का प्रमाण  है बंधा ,

जो शब्दों के सन्दर्भ से ना डगमगाये , उसी रिश्ते में संस्कार है बंधा || 

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